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राजेश जोशी की कविताएं और बातचीत

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                                राजेश जोशी  ' कौशिकी' का लगभग एक वर्ष पूरा हो रहा है और यह अवसर खास है। पचासवीं पोस्ट के रूप में इस सप्ताह पढ़िए वरिष्ठ कवि राजेश जोशी की बारह कविताएं और ताजा बातचीत जिसे संभव किया है अजय महताब ने।समकालीन कविता को जीवन से जोड़ने और इसके मुहावरे को रचने और बदलने में जिन कवियों ने अपनी उम्र लगा दी उनमें राजेश जोशी का नाम प्रमुख है।आज भी उतनी ही सक्रियता से वे मुस्तैद हैं और उनकी कविताएं अपने समय की तमाम चुनौतियों से सीधे मुठभेड़ करती हुई उनकी आवाज़ बनी हुई हैं जिनकी आवाज को दबाने की तमाम कोशिशें व्यवस्था की तरफ से अलग-अलग मोर्चे पर जारी है। राजेश जोशी की कविताएं  मैं अलक्षित हूँ कवि कह गया है  मैंने निराला को नहीं देखा , बहुत पास होते हुए भी मैं निराला से नहीं मिल पाया ! नहीं देखे को देखने की कोशिश के इस वृत्तांत में  मैं भटक रहा हूँ बरसों से ! 26 जनवरी 1961 की सुबह उस कड़़कती सर्दी में ,  मैं इलाहाबाद में ही था ,  मेरे बड़े भाई की शादी थी  और ज़ी...