जयशंकर का वक्तव्य
जयशंकर सृजन का संसार जितना रहस्यमय होता है उतना ही रोमांचक भी। महत्वपूर्ण कथाकार जय शंकर ने अपने इस वक्तव्य में सृजन के संसार के उसी रहस्य और रोमांच को शब्दों में व्यक्त किया है जो देश और काल से की सीमा से परे बहुत कुछ सोचने को बाध्य करता है। जयशंकर का वक्तव्य सृजन का संसार सृजन की दुनिया उतनी ही पुरानी है जितनी हमारी यह दुनिया। मनुष्य जब तक इस सृष्टि में रहेगा, सृजन की दुनिया भी बनी-बनती रहेगी, बसती-उजड़ती रहेगी। सृजन की इस दुनिया का आदि काल से चले आना, इसे इतना महत्वपूर्ण, मार्मिक और दिलचस्प बनाता है, तभी इसको जोखिम ली हुई, लहूलुहान दुनिया भी। बरसों-बरसों से साहित्य और कला का यह व्यापक संसार, सृष्टि में फैली बुराइयों, हिंसा और अराजकता से संवाद करता आया है, संघर्ष करता आया है। हमारे अपने क्लासिक हों या हमारे देश के बाहर के क्लासिक, हर जगह हमें बुराइयों और अच्छाइयों के बीच सतत चला आ रहा द्वंद्व और संघर्ष दिखता ...