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उमा शंकर चौधरी की कहानी

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            उमा शंकर चौधरी  हमारे यहां हर गांव में एक ऐसा पेड़ होता है जिस पर भूत रहते हैं. ऐसी जमुनी फुआ भी होती है और एक बिछिया भी. हम उन्हें कहां खोज पाते हैं. न उन्हें पहचान पाते हैं. भूतहा पेड़ की स्मृति बनी रहती है आजीवन.  मेरे जीवन में इन तीनों की सघन स्मृति है. उमा भाई की कहानी पढ़ती रही हूँ.  कहानी के अंत तक पहुँचते -पहुँचते मैं बहनापे की उस आभा से भर गई जिसकी तलाश मेरा लक्ष्य है.  मैं बिछिया बनूँ न बनूँ… जामुनी फुआ ही बन जाऊँ या जीवन में एक ऐसी फुआ खोज पाऊँ जिसकी तलाश कहानियों में करती फिरती हूँ. यही काफ़ी है.  मैंने अपनी दोस्त से कहा था कि मेरे होते कोई स्त्री अकेली नहीं हो सकती. मैं साथ बनी रहूँगी. जामुनी फुआ जैसा पावरफुल किरदार बन जाना आसान नहीं. दो स्त्रियों का संग -साथ दुनिया का चेहरा बदल सकता है.  उमा भाई की कहानी लंबी है. सारे किरदारों के चरित्र को खूब विस्तार मिला है. पूरा परिवेश खुलता है और किरदार उभरते चले आते हैं.  जिन्हें लगता है, दुनिया नई हो गई है. बदल गई है, वो अपने संसार की असली हालत समझना चाहें त...

हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएं

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  हरीश चन्द्र पाण्डे हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताओं की सबसे बड़ी खासियत उनकी भाषा,उनके मुहावरे और बेध देने वाली सादगी है जो बेचैन कर देती है।उनकी कविताएं एक तरफ तो मानवीय मूल्यों की पक्षधर हैं तो दूसरी तरफ सत्ता, व्यवस्था और पूंजी के प्रपंच के मकड़जाल को भी चिन्हित करती हैं।सीधे,सरल और मामूली विषयों पर लिखी उनकी कई कविताएं समकालीन कविता में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं। यहां प्रस्तुत कविताएं भी इसी का उदाहरण हैं। हरीश चन्द्र पाण्डे की नई कविताएं  सुनना और दीगर बातें  वह सुनने का असीम धैर्य लिए बैठा है  सबको सुनता है उनके चुक जाने तक  पक्षियों को पर फड़फड़ाने से लेकर  परों के भीतर चोंच समो लेने तक सुनता है  सरीसृपों को बिल के भीतर पूंछ सिमटाने तक  उसे आवाज़ें चाहिए बस वह चुप्पी को श्मशान की बुझी राख कहता है  कोई आवाज़ नहीं आएगी तो - वह नल की टोंटी थोड़ी ढीली कर देगा  उसकी सकारात्मकता कहती है ऊपर टंकी का खाली हो जाना  नीचे किसी पात्र का भर जाना भी हो सकता है  इधर अचानक सुनने के विरुद्ध उसने यूं टर्न ले लिया है  कहता है बहुत हो...