उर्मिला शिरीष की कहानी
उर्मिला शिरीष उर्मिला शिरीष की कहानी 'हरा पत्ता' उत्तर आधुनिक समय की उस समस्या को दर्ज करती है जिसमें अंधाधुंध विकास के क्रम में एक तरफ तो आगे निकल जाने की होड़ है दूसरी तरफ अपनी जड़ों की याद भी रह रह कर टीसती है। रिश्ते खत्म हो रहे हैं, संबंध बिखर रहे हैं,आपसी सद्भाव और सहिष्णुता की जड़ें टूट रही हैं। ऐसे में भी एक चाह है जो वापस खींच लेना चाहती है।कहानी इस द्वंद को बहुत मार्मिक तरीके से दर्ज करती है। हरा पत्ता ‘‘आपको ढेर सारी बधाईयाँ। आप भाग्यशाली हैं जो आपको पहली बार में ही ग्रीन कार्ड मिल गया है।‘‘ ‘‘धन्यवाद।‘‘ गद्गद होकर अपनी खुशी उड़ेलकर बधाई देने वाले सज्जन को उन्होंने जवाब दिया। उन दोनों की खुशी और उत्साह देखकर उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि इसमें इतनी बड़ी खुशी की क्या बात है? लोग इतना खुश क्यों हो रहे हैं। ऐसी खुशी भरी बधाईयाँ तो उनके यहाँ शादी तय होने पर, बच्चे के जन्म लेने पर या किसी का बड़ी नौकरी में चयन होने पर दी जाती थी। ‘‘हम लोग तो चैथी बार ट्राय कर रहे हैं। इस बार भी पता नहीं वीजा मिलता है या नहीं। सालों हो गये हमारे बेटे को वहाँ रहते हु...