हरि मृदुल की कविताएं
हरि मृदुल महानगरीय जीवन की विडंबनाएं और मध्य वर्गीय चरित्र के द्वंद्व को जिन कवियों ने अपनी कविताओं में प्रमुखता से चित्रित किया है उनमें हरि मृदुल का स्थान महत्वपूर्ण है।इस चकाचौंध से भरे जीवन के अंधेरे की छोटी छोटी बारीकियां उनकी कविताओं में इस तरह ध्यान खींचती है कि उनसे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। हरि मृदुल की कविताएं आवाज एक पत्ता गिरता है पचासों पत्ते गिरते हैं इस तरह हजारों पत्ते छितरते चले जाते हैं परंतु कोई आवाज नहीं सुनाई देती कितना बड़ा झूठ है यह कहना कि एक पत्ता गिरता है, तो भी आवाज सुनाई देती है कभी सुनाई भी देती रही होगी तो यह गुजरे जमाने की बात है अब ऐसी कोई आवाज नहीं सुनाई देती एक शिशु भूख से बिलबिलाता हुआ रोता दिखता है एक मां अपने बेटे के लिए विलाप करती रहती है एक पिता बुझ चुकी आंखों की जोत में से निथारता रहता है आंसू भुखमरी के दृश्य आम हैं सिलसिलेवार हुए बम विस्फोटों में चिथड़े उड़ रहे हैं नौकरी के पहले दिन गया बेटा श...