केतन यादव की कविताएं
केतन यादव संबंधों की ऊष्मा से भरी हुई केतन यादव की कविताएं मित्रता को नए कोण से देखती और दिखाती हैं। इनमें मिलने की विकलता है तो हिसाब चुकता कर लेने का जिगर भी है।इन कविताओं में आपसी संबंध, निजता, रचनात्मकता और सामाजिक सरोकार का धूसर रंग गहरे रूप में मौजूद है। केतन यादव की कविताएं फिर मिलेंगे तुम क्या हो ? तुम्हारी आवाज़ तुम हो या तुम्हारा देखना तुम्हें छूना तुम हो या एक अनबिसरे दुख की गंध संपूर्णता में तुम बस अनुपस्थिति में ही मिले छिपाए हुए ग़लती के ठीक पीछे । मैंने हमेशा चाहा मुझे कुछ कहना ही न पड़े मुझे कुछ समझाना ही न पड़े मेरी चुप्पी ही भाषा हो मेरा चेहरा ही विवरण हो भरोसा ही मेरा दोस्त हो हम आखिरी तक दोस्त रहेंगे उसने कहा । मैं सोचता था मैं मर जाऊँगा तो तुम यह खबर सुनते ही मेरी लाश के पास लौट आओगे लेकिन मैं झूठा बहाना भी तो नहीं कर सकता था कहीं अगली बार तुम सचमुच न आओ ... हम कल्पन...