लाल्टू की कविताएं
लाल्टू अपने समय के प्रतिरोध और उसके लिए बेचैनी को दर्ज करने वाली जो भाषा जो लाल्टू के पास है वह चकित करती है।इन कविताओं में हम समकालीन हिन्दी कविता के बने बनाए मुहावरे से अलग एक नया तेवर देख सकते हैं और यह तेवर बहुत पुराना है।जैसे जैसे समय बदल रहा है, समाज बदल रहा है उसी अंदाज में कविता भी बदल रही है।ये कविताएं इसी बदले हुए समय की कविताएं हैं। बिल्कुल अपने समय के नब्ज पर हाथ रखती हुई। लाल्टू की कविताएं प्रतिरोध अनजान कोई नहीं, यहाँ हर कोई मेरा माँ-जाया है अनगिनत शिकवे मेरी माँ के आँचल में आ पसरते हैं , तितलियाँ हैं चुपचाप रंग बिखेरती, यहाँ प्यार की लहरें हैं , कि हर कोई इंसान है। मेरे आँसू पोंछती औरत निरंतर तालियाँ बजाती है कि ज़माना बदलेगा। यहाँ सड़कों पर घूमते हुए देखता हूँ हर कोई चीखता कह रहा कि मार लो जितना मार सकते हो हर कोई कीड़ा कहलाता नाच रहा है हर कोई किसी और को खाना खिला रहा है यहाँ सभी खेल दुरुस्त हैं कि हर कोई खेल में शामिल है हर कोई साथ ...