अंशु मालवीय की कविताएं
अंशु मालवीय की कविताएं हमारे समय के हिंसा,उन्माद और बर्बरता की जिंदा गवाही हैं।हम जिस चकाचौंध में जी रहे हैं उसके आसपास ही एक गहरा अंधकार रचा जा रहा है और यह कोशिश अनवरत जारी है।यह अंधकार सबकुछ लील रहा है और इसका एहसास तक होने नहीं दिया जा रहा।सांड की तरह उन्मत्त पूंजी और अजेय ताकत मिल कर जो रौंद रहे हैं वह और कुछ नहीं लहलहाता हुआ भविष्य है।ये कविताएं इसी क्षत विक्षत भविष्य के बारे में सोचने के लिए विवश करती हैं। अंशु मालवीय की कविताएं अग्नि उपदेश भिख्खुओ सब कुछ जल रहा है ...! मठ जल रहा है सुत्त जल रहे हैं त्रिपिटक जल रहा है जल रहे हैं शब्द अर्थ जल रहे हैं उनके प्रेम जल रहा है,करुणा जल रही है सद्गुण जल रहे हैं, मैत्री जल रही है जल रहा है ज्ञान,तर्क जल रहा है पिघल कर बह रहा है विवेक का लावा शांति जल रही है, प्रज्ञा जल रही है जीवन जल रहा है निर्वाण जल रहा है जल रहे हैं अंतःवासी...