प्रतापराव कदम की कविताएं
प्रतापराव कदम जीवन की जटिलताओं और विडंबनाओं को प्रतापराव कदम की कविताएं उस आशा के साथ जोड़ती हैं जिसमें मिट्टी से जुड़ना उम्मीद से जुड़ना है।इन कविताओं में जो खास है वह कहन शैली है। बिना किसी शोर के ये कविताएं अपनी बात पुरजोर तरीके से रखती हैं। धीमी मगर बेहद ठोस आवाज में। प्रतापराव कदम की कविताएं बर्फ बर्फ से वाहियात दूसरी चीज नहीं लाश के अनुकूल जिंदगी के बर-खिलाफ। कैसी खामोश बिछी है तलहटी से शिखर तक जड़ का तो पता नहीं झाड़ के छोर तक है बालिश्त भर। कैसा जड़ यह संसार जिंदगी की गरमाहट नहीं एकरस, नीरस बेजान कब्रस्तान की तरह एकदम। सारी जद्दोजहद बर्फ न बनने की बर्फ न जमने देने की बतरस, भुज-भर गरमाहट झाड़ देते संबंधों पर जमी आंखों में तैरती एक उम्मीद बर्फ जमी झील में नजर आती आखिर एक किश्ती। गंध गंध के आधार पर तय करना मुश्किल कि देह जो ज...