अरुण आदित्य की कविताएं
अरुण आदित्य समकालीन कविता में जिन कवियों की पहचान उनकी भाषा और अर्जित मुहावरों से होती है उनमें अरुण आदित्य भी हैं। उनकी कविताएं जीवन के उन छोटे-छोटे अनुभवों,वस्तुओं और दृश्यों से निर्मित हैं जिनके बिना जीवन असंभव सा है। डर किसी उदास दोपहर में बिल्कुल बुझे मन के साथ हम बोर हो रहे होते हैं थोक में आए ग्रीटिंग कार्ड्स को देखकर कि अचानक हमारे हाथ में आता है एक ऐसा कार्ड जिसे देखने के बाद हम ठीक वही नहीं रह पाते जो इसे देखने से पहले थे कितना अद्भुत है यह कार्ड कि एक अच्छे ब्लॉटिंग पेपर की तरह सोख लेता है सारी ऊब और उदासी इसमें छपे फूलों की खुशबू कार्ड से बाहर निकल तैरने लगती है हवा में शिशिर ऋतु में अचानक आ जाता है बसंत हम भूल जाते हैं सारी चिड़चिड़ाहट आ जाती है इतनी उदारता की अपनी गलती न होने के बावजूद माफ़ी मांग लेते हैं कुछ देर पहले झगड़ चुके सहकर्मी से इतना विशाल हो जाता है हृदय कि वाकई क्षुद्र लगने लगती हैं अपनी क्षुद्रताएँ इतना कुछ बदल जाता है अचानक कि ग्रीटिंग कार्ड भेजने की औपचारिकता के खिलाफ सदा रहा आया मैं सोचने लगता हूँ कि दुनिया के हर आदमी को मिलना ही चाहिए एक ऐसा ...