पायल भारद्वाज की कविताएँ
पायल भारद्वाज अपने समय के स्याह सच को दर्ज करने वाली पायल भारद्वाज की कविताओं में प्रतिरोध और जीजिविषा एक साथ मौजूद है।इसमें स्त्री की सशक्त उपस्थिति नए समय के नए मुहावरों को अपनी बुलंद आवाज़ में दर्ज करती है। व्यवस्था के दमन और अन्याय को इन कविताओं में बहुत गहराई से महसूस किया जा सकता है। पायल भारद्वाज की कविताएं धूर्तता से आगे कमीनेपन की कोई हद नहीं होती, वह हर बार अपनी ही बनाई हुई एक और हद लाँघ जाता है उसके पास हर क्रूरता के लिए एक नया तर्क होता है, हर छल के लिए एक नया चेहरा वह पहले भाषा को घायल करता है, फिर सच को, फिर मनुष्यता को मुस्कुराते हुए पीठ में खंजर उतारता है, और सबसे आगे खड़ा मिलता है मरहम बाँटने वालों की कतार में सत्ता का चरित्र बना कमीनापन क़ानून की धार लिए होता है व्यवस्था का मुखौटा लगाकर राजदंड की तरह उठता है और जन-गण-मन को घायल करने का हथियार बन जाता है। अँधेरे के बीच उनसे लड़ना कैसे संभव हो जिनके लड़ने के कोई नियम नहीं, क...