सुभाष राय की कविताएं
सुभाष राय इन दिनों मनुष्य और मनुष्यता को नियंत्रित करने के लिए जिस तरह की साज़िश बड़े पैमाने पर चल रही है उसे समझना बहुत मुश्किल है लेकिन समझने से इनकार करना अकेला हो जाना है और अकेला होना अंततः मारा जाना है।सुभाष राय की कविताएं हमारे समय की इन्हीं दुरभिसंधियों का पर्दाफाश करती हैं।वे एक तरफ तो उस ताकत को चिन्हित करते हैं जो वर्चस्व की नई नियमावली के तहत सबकुछ रौंदने पर आमादा है और दूसरी तरफ प्रतिरोध के उस स्वर को भी रेखांकित करते हैं जो शैतानी सल्तनतों के शीविर रौंदते हुए कैसी भी हवा को बदल सकती है। सुभाष राय की कविताएं यात्रा यात्राओं में कभी-कभी कोई चेहरा मिल जाता है जो किसी भूले हुए दोस्त की याद दिला देता है वैसा ही कद, वैसा ही रूप-रंग अचानक याद हो आती हैं बहुत सारी घटनाएं दोस्ती और संग-साथ की लेकिन एक आकुल संशय मन को रोक देता है उस अजनबी को पुकारने से यात्राओं में कभी-कभी सुनायी पड़ती हैं सुनी हुई आवाजें मन चिहुक उठता है यह तो जोगिंदरा की आवाज है पर उसकी शकल नहीं मिलती परकायाप्रवेश में मेरा विश्वास नहीं और अगर ऐसा होता तो वह मुझे जरूर पहचान लेता लपककर मिलत...