प्रियदर्शन की कविताएं
प्रियदर्शन प्रियदर्शन की कविताएं मनुष्य और उसके आसपास की कविताएं हैं जहां जीवन के सामने संकट सबसे गहरा है। दौड़ती भागती जिंदगी और चमक दमक के तमाम उपकरणों के बीच वे लुप्त होती हुई चीजें भी हैं जो बिना किसी शोर के हमारे बीच से गायब हो रही हैं और उनका गायब होना एक सामान्य सी बात लगती है। कोई हैरानी नहीं। कोई शोक नहीं। कोई ग्लानि नही।कवि ही हैं जो उन चीजों को देखते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि हम कितना कुछ खोते जा रहे हैं दुनिया को मुट्ठी में कर लेने की गलतफहमी के बीच। 'कुछ अस्फुट सी यादें' और 'कविता विस्मृति की' श्रृंखला की ये दस कविताएं ठहर कर सोचने को बाध्य कर देती हैं और यही इन कविताओं की ताकत है कि ये असर पैदा करती हैं। कुछ अस्फुट सी यादें एक पत्ती की याद दिसंबर के कुहासे में कुछ सिकुड़ा-दुबका सा था एक विराट पेड़ मगर सबसे ऊंची शाख पर एक फुनगी हिल रही ...