वंदना राग की कहानी
वंदना राग ' कौशिकी' में इस सप्ताह पढ़िए वंदना राग की कहानी 'बूढ़े की खुजली '। उनकी कहानियों पर टिप्पणी है महत्वपूर्ण कवि और कथाकार उमा शंकर चौधरी की। वन्दना राग अपनी कहानियों में अपने समकाल को रचती हैं। हमारे समय के जो अंतद्वंद्व हैं वही उनकी कहानियों के विषय हैं। यहां साम्प्रदायिकता की समस्या से लेकर बाजार, बाजारवाद और मानसिकत गुलामी का विषय बहुत प्रमुख रूप में आया है। यहां सिर्फ स्त्री की चिंता नहीं है बल्कि यहां एक स्त्री की निगाह से देखे गए समाज में व्याप्त विषमताओं को पकड़ने की कोशिश है। एक स्त्री का सजग मन है यहां। चूंकि एक लेखिका सजग निगाह से इस समाज को देखने-समझने का प्रयास कर रही है तो निश्चितरूपेण समाज को देखने का एक नया नज़रिया यहां व्याप्त है। मनोविश्लेषणात्मक स्तर पर समस्याओं को समझना, उसे विश्लेषित करना वन्दना राग की कहानियों की एक खास विशेषता है। वे अपने पात्रों के करीब जाकर उसके साथ चलकर उसका निर्माण करती हैं। उनके पात्र अपनी सामान्य हरकतों से, सामान्य व्या...