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अनामिका की कविताएं

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अनामिका   अनामिका की कविताओं में समय, समाज और संस्कृति अपनी परंपरा और भाषाई विविधता के साथ पूरेपन में मौजूद है।यही कारण है कि इन कविताओं में एक अलग सम्मोहन है। पाठक इनकी कविताओं से गुजरते हुए बहुत कुछ सुनता,गुनता और समेटता हुआ चलता है। समकालीन कविता में लोक के साथ कोमल भाषा शैली और बिंब  की मौलिक ध्वनि इन्हें विशिष्ट और अनिवार्य बनाती रही है। यू ट्यूब पर कांतासम्मित   मेरा उनसे एक अजब तरह का रिश्ता है । जब भी बहुत ज़्यादा थक जाती हूँ, मैं देखती हूँ इनका चैनल , ये मुझको हाथ पकड़कर  एक नई दुनिया में ले जाती हैं , जो दरअसल बहुत पुरानी है- माँ के डाले खट्टे- मीठे  नींबू अचार- सी चटक, क़स्बे की दुनिया- सी  एकदम सरल और सुंदर । ये कितने आराम से बोलती हैं ! इनके स्वर में उमा दी वाला धीरज है। जैसे राजा हर्षवर्धन थे, वैसी वे-  तैयार सब संचित निधियाँ लुटाने को , मुक्तहस्त बाँटने को सारे कौशल , सारे गुर और राज़ सारे  जो गृहस्थी की तपस्या में अर्जित किए थे  या दादी- नानी, बुआ- मौसी, माँ से सीखे थे-  पाकविधियाँ और कढ़ाई- बुनाई के नमूने, केश सज्जा , र...

विमल कुमार की कविताएं

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विमल कुमार   विमल कुमार की कविताएं अपने मुहावरे के कारण अलग से पहचान में आ जाती हैं। कहते कहते कुछ गंभीर और बेचैन कर देने वाली ये कहन शैली लंबे समय से हिंदी कविता को समृद्ध कर रही है।इन कविताओं में जीवन के कोमल क्षणों से लेकर मिलने और खो देने की विह्वल कर देने वाली पीड़ा है।हमारा समय इन कविताओं में बोलता है। एक कप चाय की स्मृति! इस बुरे वक्त में चला गया एक अच्छा आदमी   नहीं जाना चाहिए था उसे अभी हम सबको बीच मझधार में छोड़कर लेकिन वह चला गया  थोड़ी देर पहले यह दर्दनाक खबर मिली है किसे पता था वह एक हादसे में मारा जाएगा अचानक एक दिन चला जाएगा  इस बुरे वक्त में  उसकी थी बहुत जरूरत सबको    लेकिन वह चला गया  आखिर क्यों अच्छे लोग  चले जाते हैं इस दुनिया से अचानक बिना इत्तला किये किसी को  क्यों चले जाते हैं  उन्हें तो इसी दुनिया में रहना चाहिए  यह दुनिया थोड़ी और अच्छी हो जाए लेकिन अच्छे लोग हमेशा चले जाते हैं बिना किसी को बताए वह आदमी भी चला गया  जो एक अच्छा नागरिक था  एक ईमानदार व्यक्ति था  एक भरोसेमंद पति था  ...

स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताएं

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                            स्वप्निल श्रीवास्तव   स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताओं में जीवन के वे अनुभव हैं जो सामान्य होकर भी स्मृतियों में गथ जाने वाले हैं। इनमें प्रेम है तो वियोग भी। करुणा है तो व्यवस्था के प्रति तंज भी। पानी जैसी बहुत कोमल भाषा में लिखी गई ये कविताएं पत्थर पर लिखी लकीर जैसी हैं।इनकी आवाज देर तक गूंजती हैं। कागज के पुल उन्होनें कागज पर कागज के पुल बनाये करिश्मा देखिए कि मैं उस पुल से बाढ़ वाली नदी को पार कर गया नदी में कागज की नावें और कागज के नाविक थे और लोग डूबने से बच गये थे कागज के हवाई जहाज से उन्होंने बाढ़ग्रस्त इलाके का दौरा किया लोगों को राहत सामग्री बांटी  लोग कागज में खुश खुश थे कागज हमने ही बनाये थे उन्होनें उससे कागज की नाव बना कर वैतरणी पार करा दी इस जीवन के साथ हमारा अगला जीवन भी सफल हो गया कितने अच्छे थे वे कागज के लोग। रेलवे – स्टेशन मुझे अपने शहर का छोटा सा रेलवे स्टेशन बहुत पसंद है यहाँ केवल पैसेंजर ट्रेनें रुकती थी उससे उतरने वाले मुसाफिर अपने से लगते थे कुछ दोस्त प...

सौम्य मालवीय की कविताएं

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सौम्य मालवीय  कविता के नए स्वर में जो महत्वपूर्ण और उम्मीद से देखे जाने वाले नाम हैं उनमें सौम्य मालवीय भी हैं।उनकी कविताओं में अपने समय और समाज का वह सच दिखता है जो उपेक्षा का शिकार है। विकास के मील के पत्थर रोज किन चीजों को रौंद कर गाड़े जा रहे हैं,उनके बारे में इनकी कविताएं बात करती हैं। इनकी कविताओं में एक बेचैनी है जो पढ़ने वाले में भी हलचल पैदा करती है। पहाड़ धरती का शहीद है क्या कह सकता है पहाड़  कहीं उठकर चल तो नहीं सकता  समेट नहीं सकता अपनी सलवटें  अपने पैर मोड़ कर-सर गोड़ कर बैठ नहीं सकता  उसे तो रहना है सर उठाये   कंधे से कंधा मिलाये  उसकी नदियाँ बौखलाती हैं  बदलियाँ बजर ढहाती हैं  वो समझाता ही है कहता है धीरज से बहो-हरो मेरा दुख  छाओ-बोते रहो धमनियों में आसमान  वो ढहता है अपनी ही मिट्टी में  एक-एक कर टूटती हैं शिलाएँ दरकती है देह-जल सूखता है पत्थरों का  वो नहीं किसी का संतरी-किसी का पासबाँ राजमार्ग, सुरंगें, खनिज चूसने के यंत्र  कितना भी दावा धरें उस पर  राष्ट्रीय सम्पदा कह कर  हक़ीक़त तो ये है कि...