हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएं
हरीश चन्द्र पाण्डे हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताओं की सबसे बड़ी खासियत उनकी भाषा,उनके मुहावरे और बेध देने वाली सादगी है जो बेचैन कर देती है।उनकी कविताएं एक तरफ तो मानवीय मूल्यों की पक्षधर हैं तो दूसरी तरफ सत्ता, व्यवस्था और पूंजी के प्रपंच के मकड़जाल को भी चिन्हित करती हैं।सीधे,सरल और मामूली विषयों पर लिखी उनकी कई कविताएं समकालीन कविता में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं। यहां प्रस्तुत कविताएं भी इसी का उदाहरण हैं। हरीश चन्द्र पाण्डे की नई कविताएं सुनना और दीगर बातें वह सुनने का असीम धैर्य लिए बैठा है सबको सुनता है उनके चुक जाने तक पक्षियों को पर फड़फड़ाने से लेकर परों के भीतर चोंच समो लेने तक सुनता है सरीसृपों को बिल के भीतर पूंछ सिमटाने तक उसे आवाज़ें चाहिए बस वह चुप्पी को श्मशान की बुझी राख कहता है कोई आवाज़ नहीं आएगी तो - वह नल की टोंटी थोड़ी ढीली कर देगा उसकी सकारात्मकता कहती है ऊपर टंकी का खाली हो जाना नीचे किसी पात्र का भर जाना भी हो सकता है इधर अचानक सुनने के विरुद्ध उसने यूं टर्न ले लिया है कहता है बहुत हो...