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बाबुषा कोहली की कविताएं

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  बाबुषा कोहली  'फूल,कविता,प्रेम और युद्ध के इर्द-गिर्द' बाबुषा कोहली की इन तेरह छोटी कविताओं में हमारे समय का वह स्याह सच है जो मनुष्य और मनुष्यता का सबसे बड़ा दुश्मन है।युद्ध उनमें से एक है जो इन दिनों दुनिया के अधिकांश हिस्से को अपनी चपेट में ले चुका है। ऐसे कठिन समय में ये कविताएं प्रेम, कविता और मनुष्यता पर अखंड विश्वास की कविताएं हैं। फूल, कविता, प्रेम और युद्ध के इर्द-गिर्द   १. जब दो देश लड़ रहे होते हैं  तब पूरी दुनिया युद्ध में होती है  जब नहीं लड़ रहे होते  तब भी  २. एक आजीवन चल रहे युद्ध में  शरणार्थी शिविर है  कविता  ३ . उन्हें फूलों को बरतना नहीं आता  वे कविता का तेज नहीं सह पाते  उनके भीतर भरा हुआ है ग़ुस्सा  प्रेम कभी उन पर मेहरबान नहीं हुआ  वे वेध्य हैं उपयुक्त हैं उपलब्ध हैं  युद्ध बड़ी आसानी से उनका शिकार कर लेगा  ४ . युद्ध पर विमर्श-विलास के लिए होना चाहिए  बहुत थोड़े से शब्दों या वाक्यों का सम्यक दोहराव  और एक गहन मूर्च्छा जबकि युद्ध के विरुद्ध खड़े होने के लिए  काफ़ी है ए...