स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताएं
स्वप्निल श्रीवास्तव स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताओं में जीवन के वे अनुभव हैं जो सामान्य होकर भी स्मृतियों में गथ जाने वाले हैं। इनमें प्रेम है तो वियोग भी। करुणा है तो व्यवस्था के प्रति तंज भी। पानी जैसी बहुत कोमल भाषा में लिखी गई ये कविताएं पत्थर पर लिखी लकीर जैसी हैं।इनकी आवाज देर तक गूंजती हैं। कागज के पुल उन्होनें कागज पर कागज के पुल बनाये करिश्मा देखिए कि मैं उस पुल से बाढ़ वाली नदी को पार कर गया नदी में कागज की नावें और कागज के नाविक थे और लोग डूबने से बच गये थे कागज के हवाई जहाज से उन्होंने बाढ़ग्रस्त इलाके का दौरा किया लोगों को राहत सामग्री बांटी लोग कागज में खुश खुश थे कागज हमने ही बनाये थे उन्होनें उससे कागज की नाव बना कर वैतरणी पार करा दी इस जीवन के साथ हमारा अगला जीवन भी सफल हो गया कितने अच्छे थे वे कागज के लोग। रेलवे – स्टेशन मुझे अपने शहर का छोटा सा रेलवे स्टेशन बहुत पसंद है यहाँ केवल पैसेंजर ट्रेनें रुकती थी उससे उतरने वाले मुसाफिर अपने से लगते थे कुछ दोस्त प...